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।। आरती जगदीश जी की ।।

।। आरती जगदीश जी की ।।

 

ॐ जय जगदीश हरेस्वामी जय जगदीश हरे । 

भक्त जनो के संकट क्षण में दूर करें ।। ॐ ।। 

जो घ्यावे फल पावे बिनसे मनका ।।प्र.।। 

सुख सम्पति घर आवै कष्ट मिटे तनका ।। ॐ ॥

 मातु पिता तुम मेरे शरण गहूं मै किसकी ।। प्र.।।

 तुम बिन और न दूजा आस करूं जिसकी ।। ॐ ।। 

तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी ।। प्र.।।

पार ब्रम्ह परमेश्वरतुम सबके स्वामी ।। ॐ ।।

तुम करूणा के सागर तुम पालन करता ।। प्र.।। 

मैं मुरख खल कामी कृपा करो भरता ।। ॐ।। 

तुम हो एक अगोचर सबके प्राण पती ।। प्र. ।। 

किस विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमती ।। ॐ ।।

दीन बन्धु दुख हरतातुम ठाकुर मेरे ।। पर.।। 

अपने हाथ उठाओव्दार पडा तेरे ।। ॐ.।। 

विषय विकार मिटाओपाप हरो देवा ।। प्र. ।। 

श्रद्धा भक्ति बढाओसन्तन की सेवा ।। ॐ।।

 

 


समर्थ रामदास रचित || श्री नरसिंह पंचक ||

|| श्री नरसिंह पंचक || नरहरी नरपाळें भक्तपाळें भुपाळें। प्रगट रूप विशाळें दाविलें लोकपाळें। खवळत रिपुकाळें काळकाळें कळाळें। तट तट तट स्तंभि ...

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