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आरती गजवदन विनायक

 आरती गजवदन विनायक

 

आरती गजवदन विनायक की। सुर-मुनि-पूजित गणनायककी॥

 आरती गजवदन विनायक की॥

 

एकदन्त शशि भाल गजानन, विघ्नविनाशक शुभगुण कानन।

शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन, दुःख विनाशक सुखदायक की॥ 

आरती गजवदन विनायक की॥

 

ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति, विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति। 

अघ-वन-दहन अमल अबिगत गति, विद्या-विनय-विभव-दायक की॥

आरती गजवदन विनायक की॥

 

पिङ्गल नयन, विशाल शुण्डधर धूम्रवर्ण रुचि अंकुश-कर। 

लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर सुर-वन्दित सब विधि लायक की॥ 

आरती गजवदन विनायक की।

 


समर्थ रामदास रचित || श्री नरसिंह पंचक ||

|| श्री नरसिंह पंचक || नरहरी नरपाळें भक्तपाळें भुपाळें। प्रगट रूप विशाळें दाविलें लोकपाळें। खवळत रिपुकाळें काळकाळें कळाळें। तट तट तट स्तंभि ...

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