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॥ सरस्वती प्रार्थना॥

॥ सरस्वती प्रार्थना॥
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
पद्मपत्रविशालाक्षी पद्मकेसरवर्णिनी।
नित्यं पद्मालया देवी सा मां पातु सरस्वती ॥
या कुन्देन्दु तुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणा वरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भि स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना
हस्तेनैकेन पद्म सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण।
भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना
सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥

समर्थ रामदास रचित || श्री नरसिंह पंचक ||

|| श्री नरसिंह पंचक || नरहरी नरपाळें भक्तपाळें भुपाळें। प्रगट रूप विशाळें दाविलें लोकपाळें। खवळत रिपुकाळें काळकाळें कळाळें। तट तट तट स्तंभि ...

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